भारतीय ग्रंथ और उनके रचनाकार: रामायण से हर्षचरित तक की साहित्यिक परंपरा

Thu 22-Jan-2026,12:59 AM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

भारतीय ग्रंथ और उनके रचनाकार: रामायण से हर्षचरित तक की साहित्यिक परंपरा Indian Literature
  • भारतीय साहित्य के प्रमुख ग्रंथ और उनके महान रचनाकार.

  • धर्म, संस्कृति और जीवन मूल्यों का साहित्यिक दर्शन.

  • रामायण से हर्षचरित तक की कालजयी कृतियाँ.

Maharashtra / Nagpur :

Nagpur / भारतीय साहित्य और संस्कृति की जड़ें अत्यंत प्राचीन, गहन और गौरवशाली रही हैं। हमारे महाकाव्य, ग्रंथ और काव्य केवल साहित्यिक रचनाएँ नहीं हैं, बल्कि वे जीवन-मूल्य, धर्म, कर्तव्य, प्रेम, त्याग और वीरता की जीवंत परंपराएँ भी हैं। “किसने लिखा कौन-सा ग्रंथ” यह प्रश्न सामान्य दिखता है, लेकिन इसके पीछे छिपी रचनात्मक साधना और कालजयी दृष्टि को समझना अत्यंत आवश्यक है।

महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि कहा जाता है। उन्होंने रामायण की रचना की, जो संस्कृत साहित्य का प्रथम महाकाव्य माना जाता है। रामायण केवल श्रीराम की कथा नहीं है, बल्कि यह आदर्श जीवन का मार्गदर्शन है। पिता-पुत्र का संबंध, पति-पत्नी का प्रेम, भाईचारा, राजा का कर्तव्य और त्याग—इन सभी को वाल्मीकि ने करुणा और सौंदर्य के साथ प्रस्तुत किया। कहा जाता है कि वाल्मीकि के हृदय से निकला शोक ही श्लोक बन गया।

महर्षि वेद व्यास भारतीय ज्ञान परंपरा के सबसे महान स्तंभों में से एक हैं। उन्होंने महाभारत की रचना की, जो विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य माना जाता है। महाभारत केवल युद्ध की कथा नहीं है, बल्कि यह धर्म और अधर्म के संघर्ष की दार्शनिक व्याख्या है। इसमें राजनीति, समाज, युद्धनीति, मनोविज्ञान और अध्यात्म—सब कुछ समाहित है। श्रीमद्भगवद्गीता जैसे अमूल्य उपदेश इसी ग्रंथ का हिस्सा हैं।

गोस्वामी तुलसीदास ने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना कर रामकथा को जन-जन तक पहुँचा दिया। यह ग्रंथ भक्तिकाल की अमर धरोहर है। तुलसीदास ने सरल भाषा में गहन दर्शन प्रस्तुत किया, जिससे आम व्यक्ति भी राम के चरित्र और आदर्शों को समझ सका। रामचरितमानस आज भी घर-घर में श्रद्धा से पढ़ा जाता है।

महाकवि कालिदास संस्कृत साहित्य के श्रेष्ठ कवि और नाटककार माने जाते हैं। उनकी प्रसिद्ध कृति अभिज्ञान शाकुन्तलम् प्रेम, विरह और पुनर्मिलन की अद्भुत कहानी है। इसमें भाषा की मधुरता, प्रकृति का सौंदर्य और मानवीय भावनाओं की सूक्ष्म अभिव्यक्ति दिखाई देती है। कालिदास की रचनाएँ आज भी विश्व साहित्य में सम्मान के साथ पढ़ी जाती हैं।

चंद बरदाई ने पृथ्वीराज रासो की रचना की, जिसमें पृथ्वीराज चौहान के शौर्य, पराक्रम और प्रेम की गाथा है। यह ग्रंथ वीर रस का उत्कृष्ट उदाहरण है और राजपूत परंपरा की वीरता को अमर बनाता है।

बाणभट्ट ने हर्षचरित लिखा, जो सम्राट हर्षवर्धन का ऐतिहासिक और साहित्यिक जीवनवृत्त है। यह संस्कृत गद्य साहित्य की महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है, जिसमें उस समय के समाज, राजनीति और संस्कृति की झलक मिलती है।

इन सभी ग्रंथों और उनके रचनाकारों ने भारतीय सभ्यता को दिशा दी है। वे केवल लेखक नहीं थे, बल्कि युगदृष्टा थे, जिनकी रचनाएँ आज भी हमें सोचने, समझने और सही मार्ग चुनने की प्रेरणा देती हैं।